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जून, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गुब्बारे

मेरे बचपन में मानिकपुर जंगल के किनारे बसा हुआ एक गांव था। जहां थाना रेलवे स्टेशन अस्पताल रेंज ऑफिस ब्लॉक तथा एक छोटी सी बाजार थी। बस्ती इन्हीं ऑफिसऔर बाजार के आसपास बसी हुई थी। हमारा घर मुसलमानी मोहल्ले में था, जहां पर ज्यादातर मुसलमानों के घर थे दो चार घर छोड़ के। हमारा पक्का मकान था बाकी ज्यादातर घर कच्चे बने हुए थे। बचपन के मेरे दोस्त सलीम भाई का मकान हमारे घर के बगल में था। मेरे पिताजी जंगल के ठेकेदार थे तथा सलीम भाई के पिताजी रेलवे के कर्मचारी थे। सलीम भाई की मां बहुत गरम मिजाज की थी तथा उनकी जबान भी बड़ी सख्त थी। जब भी वह बोलती तो कुछ सुंदर-सुंदर गालियां उनके मुंह से जरूर बरसती थी। यह तो कहानी के कुछ पात्रों तथा स्थान का सूक्ष्म परिचय था। कहानी इस प्रकार है की मैं और सलीम भाई अच्छे मित्र थे पड़ोसी से थे तथा कंचा खेलने में पार्टनर थे। सलीम मुझसे लंबे तथा डेबरे थे। डेबरे का मतलब बाएं हाथ से काम करने वाले, इन योग्यताओं के कारण वह बहुत अच्छे कंचा के खिलाड़ी थे। बच्चों के, कंचा खेल ओलंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट विजेता थे। ज्यादातर बच्चों के कंचे वह खेल में जीत जाते थे, पार्टनर होने के नाते...

पुल्ले बाबू

मेरा जन्म कार्तिक पूर्णिमा को हुआ था अतः मुझे बचपन में पूर्णी नाम से पुकारा जाता था, जो बाद में बिगड़ कर के पुन्नी हो गया ।आज भी मेरे परिवार के तथा बड़े बुजुर्ग पुन्नी कहकर ही बुलाते हैं। मैंने सुना है ज्यादातर लोगों के दो नाम होते हैं, एक घर का और एक स्कूल का। मेरे कई नाम हैं जैसे कुन्डली का नाम इन्द्रजीत, स्कूल में पहले नाम प्रकाश लिखाया गया फिर कक्षा पांच में परिवर्तन कर के चन्द्रभाल हो गया। इलाहाबाद में जब E C C में  पढ़ने पहुंचा तो चन्द्रभाल नाम लेने में लोगों की ज़बान को तकलीफ होने लगी और उन्होंने चन्दू नाम रख दिया। मेरा एक और भी नाम है पुल्ले बाबू।यह मेरा नाम बहुत ही कम लोग जानते हैं,अब तो शायद मेरी पत्नी और मेरे बच्चे ही, क्यों कि उन्होंने मेरे बचपन की कहानियां मेरी मां और बाबूजी से सुनी है। यह नाम देने वाले, मुझे बहुत चाहते और प्यार करते थे, मुझे खूब ढेर सारे सूखे मेवे खिलाते थे - वो थे खूब लंबे चौड़े, अफगानिस्तान के पठान  बाबा। पठान  बाबा सूखे मेवे के व्यापारी थे और मेरी पैदाइश से पहले से मानिकपुर आते थे। वो तीन-चार बोरे सूखे मेवे लाते और हमारे घर के एक कमरे बोर...