लौट के चन्दू घर को आये
एक वर्ष परेशानी, तनाव और संघर्ष में बड़ी मुश्किल से बीता। उरई में बीते एक साल ने मेरे आत्म विश्वास और मनोवैज्ञानिक सोच विचार तथा मेरे व्यवहार बहुत ख़राब असर डाला। बदनामी और ग़लत ख़बरें की गति बहुत तेज होती है। मेरे इलाहाबाद पहुंचने से पहले उरई कांड की खबर,आधे शहर में और मेरे जान-पहचाना के लोगों तक पहले पहुंच गयी थी।जो मिलता वह हाल-चाल पूछने से पहले पूछता चन्दूभाई का हुआ उरई वाले केस में,सब ठीक ठाक हो गया ना। हमारे लायक कौनो काम हो तो बताओ।हमारा नाम वैसे भी `बहुत भले लोगो' था, एक और तगमा लग गया। खैर हम इन्टरमीडिएट मैथ्स और साइंस से पास हो गये और इलाहाबाद पहुंचे कर हमारा एडमिशन C M P डिग्री कालेज में B S c फर्स्ट इयर करा दिया गया। हमारे मित्र कुंवर भी वहां मिल गये वो हमारे क्लास में ही थे। बड़े भैया की शादी हो जाने के कारण यह महसूस किया गया कि जिस घर में हमारा परिवार किराये पर रहता है,वह छोटा है तथा लड़कियों के कालेज से दूर है। इसलिए बाबूजी ने एक बड़ा मकान जो दो मंजिला था जिसमें सब के लिए पर्याप्त स्थान था तथा कई कमरे थे, किराए पर लिया, जिसका हाउस नंबर १०० था। यह मकान आगे चलकर हमारे...